कोरोना महामारी ने कई ब्यूटी ट्रेंड्स को जन्म दे दिया है। पेस्टल कलर्ड ट्रेसेज से लेकर फिजिटल ब्यूटी ट्रेंड्स तक। पूरे विश्व में ब्यूटी ट्रेंड्स बदल रहे हैं। इन्हीं ट्रेंड में से एक जिसे हमने स्पॉट किया है, वह है नॉन इनवेसिव स्किन ट्रीटमेंट्स। इन कीप फिट टाइप स्किन ट्रीटमेंट्स के बारे में अच्छी तरह से समझने के लिए हमने डर्मटॉलजिस्ट से बातचीत की।

हमारी एक्सपर्ट डॉ दिव्या शर्मा, एम डी डर्मेटोलॉजी, बताती हैं " नॉन इनवेसिव ट्रीटमेंट्स ऐसे तरीके होते हैं, जिससे आपकी स्किन की सतह ब्रेक ना हों।" ऐसे जितने भी तरीके, जिनको नॉन इनवेसिव कहा जाता है, इसमें सर्जरी नहीं होती है और यह बेहद कम समय में हो जाता है। यह मुख्य रूप से आउट पेशेंट आधार पर किया जाता है। जैसे, ऐसे कई नॉन इनवेसिव विकल्प होते हैं, जो स्किन को टाईट करते है और एजिंग की समस्या जैसे झुर्रियां, प्रॉमिनेंट जोल्स और जौ लाइंस को भी ठीक करते हैं। इसमें किसी को भी अपनी नाक के आकार को ठीक करने के लिए, किसी चीर फाड़ की ज़रूरत नहीं होती है, क्योंकि इसे बेहद कम समय में कर दिया जाता है, डर्मल फीलर का इस्तेमाल करके" इस ट्रीटमेंट से आप और भी ब्यूटी की कई परेशानियों को खत्म कर सकते हैं।

तो आखिर क्या वजह है कि अब जाकर इसको इतनी लोकप्रियता मिलती है।

 

क्यों इन दिनों पॉपुलर है नॉन इनवेसिव प्रोसीजर्स

क्यों इन दिनों पॉपुलर है नॉन इनवेसिव प्रोसीजर्स

डॉ दिव्या के अनुसार " महामारी के कारण, सर्जरी और इनवेसिव प्रोसीजर्स करवाने में सेफ्टी को लेकर चिंताएं बढ़ गई है, क्योंकि इसमें अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है। ऐसे में दिमाग में यह बात हमेशा चल रही होती है कि भर्ती होने पर कहीं कोई इंफेक्शन न हो जाये। ऐसे में नॉन इनवेसिव ट्रीटमेंट्स बेहद सुरक्षित तरीका है ". 

डॉ दिव्या का कहना है " महिलाएं इन दिनों लोअर फेसलिफ्ट्स, नेक लिफ्ट्स और खासतौर जॉ लाइन को लेकर ट्रीटमेंट्स करवा रही हैं। कई मरीज स्किन टाइटनिंग के लिए अल्ट्रा साउंड और रेडियो फ्रीक्वेन्सी जैसे तरीके भी अपना रहे हैं। फैट फ्रीजिंग और इस तरह के तरीकों की भी डिमांड बढ़ रही है, जिससे फैट पॉकेट्स का ध्यान रखा जाये जो कि खराब लाइफ स्टाइल और वज़न बढ़ने की समस्या के कारण होता है। 

क्या यह लोगों की सोच में बदलाव के कारण हुआ है कि नॉन इनवेसिव ट्रीटमेंट्स लाइम लाइट में आया है। लेकिन यह बदलाव अचानक क्यों हुआ ?

 

नॉन इनवेसिव स्किन ट्रीटमेंट्स को अब नजरअंदाज क्यों नहीं किया जा सकता ?

नॉन इनवेसिव स्किन ट्रीटमेंट्स को अब नजरअंदाज क्यों नहीं किया जा सकता ?

डॉ दिव्या के अनुसार, “बोटुलिनम टोक्सिन और डर्मल फिलर्स की अचानक डिमांड बढ़ गई है, क्योंकि यह झुर्रियों से छुटकारा पाने और फेशियल फीचर्स को परफेक्ट बनाने में मदद करता है। इसकी बड़ी वजह यह भी है कि इन दिनों महामारी के दौरान, लोग का वर्चुअल मीटिंग के दौरान चेहरा ही अधिक नजर आता है और वह अपने चेहरे को हमेशा ज़ूम रेडी रखना चाहते हैं।“

डॉ दिव्या आगे यह भी कहती हैं " सोशल डिस्टेंसिंग के कारण लोगों का एक दूसरे के चेहरे पर ही ध्यान देने में अधिक वर्चुअल टाइम स्पेंट हो जाता है। ऐसे में यह आश्चर्यजनक बात है कि मरीजों का फोकस अभी फेस पर अधिक है। खासतौर से आंखों, लोवर फेस और जॉ लाइन पर। डबल चिन इन दिनों एक नया ब्रेक आउट है, जिससे हर कोई छुटकारा पाना चाहता है। आजकल लोगों का स्ट्रक्चरल फेशियल सीमेट्री और अंडर आई यानी आंखों के नीचे वाले जगहों पर अधिक फोकस है। डार्क सर्कल्स, फाइन लाइंस और पफी आइज़ जैसी चीजों को लेकर लोग अधिक हमारे पास आते हैं। फ्लॉ लेस फेस महामारी के दौर में अधिक डिमांड में है "

 

क्या नॉन इनवेसिव स्किन ट्रीटमेंट्स से क्वारंटीन स्किन को फायदा होगा ?

क्या नॉन इनवेसिव स्किन ट्रीटमेंट्स से क्वारंटीन स्किन को फायदा होगा ?

1 डॉ दिव्या कहती हैं " यह दुखद है कि महामारी के दौरान लोगों को वर्क फ्रॉम होम करना पड़ रहा है, इसकी वजह से वह स्क्रीन पर अधिक समय बिता रहे हैं। जैसा कि हम जानते हैं कि लेट नाइट रूटीन और रेडिएशन एक्सपोजर स्किन की प्री मैच्योर वाली परेशानी को बढ़ा रही है। इसके अलावा विटामिन डी की कमी और वज़न बढ़ने के कारण एक्ने ब्रेक आउट्स की परेशानी बढ़ गई है। महामारी के कारण स्किनकेयर की तरफ लोगों का ध्यान कम हो गया है। "

लेकिन ऐसा नहीं है कि आप अपनी स्किन पर फिर से वह निखार लौटा नहीं सकते। लोग सलोन जाने में हिचकिचा रहे हैं, ऐसे में डॉ दिव्या द्वारा दिए गए ये क्वीक प्रोसीजर्स से आपको अच्छे नतीजे मिल सकते हैं।

01 . केमिकल पील्स, जैसे- ग्लाइकोलिक एसिड ग्लोइंग कॉम्प्लेक्शन को पाने के लिए एक अच्छा और क्विक तरीका है।

02. बहुत देर या लम्बे समय तक फेस मास्क लगाने की वजह से भी मास्कने की परेशानी बढ़ रही है। ऐसे में सैलिसिलिक पील्स आपकी रूटीन चेक आप का हिस्सा बन जाता है और आपको मुंहासों से छुटकारा पाने में भी आसानी होती है।

03 लेज़र टोनिंग, जिसमें क्यू स्विच्ड लेज़र के लो फ्रीक्वेंसी शामिल होते हैं, यह आपकी स्किन टोन को एक बराबर करने में और ब्लेमिशेज़ ( डार्क स्पॉट, कोई निशान, दाग या कुछ अजीब सा स्किन पर उभर आना ) को ठीक करने में भी मदद करता है।

04 . आई पी एल फोटो फेशियल्स और कार्बन पील्स बेहद सेफ और जल्दी से असरदार साबित होने वाले तरीके हैं, जिनसे एक्ने और ब्लैक हेड्स जैसी परेशानी से छुटकारा मिलता है।