अपने मेकअप को सेट करने के लिए पाउडर लगाना बेहद ज़रूरी है, फिर चाहे आपकी स्किन ड्राय हो, ऑइली या फिर नॉर्मल। ऐसा इसलिए ताकि आपके मेकअप पर क्रीज़ न आए। लेकिन जब बात आती है पाउडर खरीदने की, तो अधिकतर लड़कियां कनफ्यूज़ हो जाती हैं कि उन्हें ट्रांस्लुसेंट पाउडर खरीदना चाहिए या टिंटेड सेटिंग पाउडर। क्या आपके साथ भी ऐसा ही है? हमारी बात मानें तो आपको ज़रूरत है दोनों पाउडर की। ट्रांस्लुसेंट पाउडर और टिंटेड पाउडर, दोनों स्किन पर अलग-अलग काम करते हैं। मेकअप सेट करने के अलावा भी ये कई काम आते हैं। चलिये, जानते हैं, दोनों में क्या अंतर है और क्यों ज़रूरत है दोनों पाउडर की।

translucent vs tinted setting powder

क्या है ट्रांस्लुसेंट पाउडर ?

जैसा कि नाम से ही ज़ाहिर है ट्रांस्लुसेंट पाउडर ट्रांस्परेंट यानि पारदर्शी और रंग हीन होता है और इसे मेकअप सेट करने के लिए काम में लिया जाता है। इससे फ़ेस का एक्सेस ऑइल हट जाता है, जिससे आपके फ़ेस को मिलता है मैट फिनिश। चूंकि पाउडर रंग हीन होता है, इसलिए यह कोई कवरेज नहीं देता।

कब लगाना चाहिए ट्रांस्लुसेंट पाउडर?

ट्रांस्लुसेंट पाउडर मेकअप को सेट करने और फ़ेस को ब्राइट करने के काम आता है। आप ट्रांस्लुसेंट पाउडर को वहीं लगाएं, जहां आप ब्राइटनिंग कंसीलर लगाते हैं, जैसे-आंखों के नीचे, नाक के आस-पास और मुंह के आस-पास। अक्सर लोग इस पाउडर को पूरे फ़ेस पर लगा लेते हैं, यह मिस्टेक न करें, वरना आपका फ़ेस ऐसा लगेगा जैसे किसी ने सफेदी पोत दी हो।

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क्या है टिंटेड सेटिंग पाउडर?

टिंटेड पाउडर कई शेड्स में आते हैं, इसलिए आपको ज़रूरत है ऐसे शेड की जो आपकी स्किन से मिलता-जुलता हो। यह न सिर्फ आपके मेकअप को सेट करता है, बल्कि थोड़ा कवरेज भी देता है, रेडनेस को ठीक करता है और इससे स्किन पैची नहीं लगती।

कब लगाना चाहिए टिंटेड सेटिंग पाउडर?

टिंटेड सेटिंग पाउडर को आप पूरे फ़ेस पर लगा सकते हैं, यानि नोज़, माउथ, चिन, यहां तक कि चीक्स, नेक और फोरहेड पर भी। ऐसा इसलिए कि जहां ट्रांस्लुसेंट पाउडर कुछ ख़ास एरिया को ब्राइट करता है, वहीं टिंटेड सेटिंग पाउडर आपकी पूरी स्किन को इवन (एकसार) कर देगा, जिससे ब्राइटनिंग इफेक्ट की ज़रूरत ही नहीं होगी।