चेहरे पर मौजूद वाइटहेड्स चिढ़ पैदा करते हैं, ये परेशानीभरे और कई बार पस से भरे होते हैं. यही नहीं ये चेहरे के किसी भी हिस्से पर हो सकते हैं. जीवन में एक बार तो यह समस्या सभी को होती ही है. कई लोग तो लगातार अपने चेहरे पर मौजूद वाइटहेड्स को दबा कर हटा देने की इच्छा के साथ ही जीवन गुज़ारते रहते हैं.

और तब क्या, जब हम आपसे कहें कि इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है? और इस तरीके में वाइटहेड्स को छूना या फोड़ना भी शामिल नहीं है. जी हां, यह बिल्कुल सही है. वाइटहेड्स होने का कारण जान लेना मतलब इन्हें हटाने की दिशा में पहला क़दम उठा लेना ही तो है. यहां हम बता रहे हैं कि चेहरे के अलग-अलग हिस्सों पर वाइटहेड्स आख़िर क्यों होते हैं.

 

नाक पर

नाक पर

अक्सर नाक के आसपास वाइटहेड्स हो ही जाते हैं. इसकी वजह यह है  कि चेहरे पर आपका टी ज़ोन वो जगह है, जहां और हिस्सों की तुलना में तेल का उत्पादन सबसे ज़्यादा होता है. यह ऑइली या कॉम्बिनेशन स्किन टाइप पर और भी ज़्यादा होने और दिखाई देने वाली समस्या है. यहां वाइटहेड्स अक्सर ब्लैकहेड्स के साथ होते हैं और हटने में बड़ा समय लगाते हैं, क्योंकि उनकी जड़ें हमारी त्वचा के भीतर गहराई में छुपी होती हैं. ऐसे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल, जिनमें सैलिसिलिक ऐसिड, ग्लाइकॉलिक ऐसिड या लैक्टिक ऐसिड मौजूद हो नाक के आसपास के वाइटहेड्स को हटाने में बहुत प्रभावी होते हैं.

 

माथे पर

माथे पर

ये आपके चेहरे का वो दूसरा हिस्सा है, जहां सबसे ज़्यादा वाइटहेड्स होते हैं, क्योंकि यहां भी बहुत ज़्यादा तेल का उत्पादन होता है. यदि आपके शॉर्ट बैंग्स या फिर ऐसी हेयरस्टाइल है, जिसकी वजह से बाल माथे पर आते हैं तो यह भी रोमछिद्रों के बंद होने की वजह हो सकती है. आपके बाल अपना तेल और बैक्टीरियाज़ माथे पर ट्रांस्फ़र कर देते हैं और इसकी वजह से वाइटहेड्स या पिम्पल्स हो सकते हैं. हेयर स्टाइल बदलने से आपको इस समस्या से छुटकारा मिल सकता है और आपकी त्वचा की सेहत अच्छी हो सकती है. अपने माथे के हिस्से को साफ़ करने के लिए सौम्य एक्स्फ़ॉलिएटिंग क्लेंज़र का इस्तेमाल करें, जिससे यहां के बंद रोमछिद्र खुल जाएं और इस हिस्से में अतिरिक्त तेल के उत्पादन पर नियंत्रण लग सके.

 

गालों पर

गालों पर

यदि आपको गालों पर छोटे-छोटे फूले हुए हिस्से यानी उभार (बम्प्स) नज़र आते हैं तो ये वाइटहेड्स हो सकते हैं या फिर केराटोसिस पिलैरिस भी हो सकते हैं. यदि आपकी त्वचा हेयर फ़ॉलिकल्स में अतिरिक्त केराटिन का उत्पादन करती है तो आपको केराटोसिसस पिलैरिस (केपी) हो सकता है. ये बिल्कुल वाइटहेड्स की तरह ही होता है, लेकिन इसकी स्थिति अलग होती है और इलाज बहुत अलग ढंग से किया जाता है. जिन लोगों की त्वचा रूखी होती है उन्हें केपी होने की संभावना ज़्यादा होती है, जबकि जिनकी त्वचा ऑइली होती है उन्हें वाइटहेड्स होने की संभावना अधिक होती है. सबसे पहले तो यह जानने की कोशिश करें कि गालों पर मौजूद ये बम्प्स वाइटहेड्स हैं कि केपी और जब आपको इस बारे में पता चल जाए तो इसका इलाज करवाएं और अपनी डाइट में ओमेगा 3 और विटामिन A शामिल करें.

 

ठोढ़ी पर

ठोढ़ी पर

बिल्कुल माथे और नाक की ही तरह चेहर पर ठोढ़ी यानी चिन वो जगह है जहां प्राकृतिक रूप से तेल का ज़्यादा उत्पादन होता है. स्किन एक्स्पर्ट्स की मानें तो ठोढ़ी पर होने वाले वाइटहेड्स हॉर्मोनल बदलाव का नतीजा होते हैं. अक्सर ऐन्ड्रोजेन का स्तर बढ़ने से ज़्यादा और बहुत गाढ़ा सीबम निकलता है. यदि वाइटहेड्स और पिम्पल्स हॉर्मोनल असंतुलन की वजह से हो रहे हैं तो आपको ऐसी चीज़ों को अपनी डायट से बाहर निकाल देना चाहिए, जिनमें हॉर्मोन्स का इस्तेमाल होता है, जैसे- डेयरी प्रोडक्ट्स.