स्कैबिज़ स्किन में होने वाली, एक बेहद दर्दनाक और अत्यधिक संक्रामक स्थिति है, जिसका जल्द से जल्द इलाज किया जाना चाहिए। इस स्किन की स्थिति का मुख्य कारण सारकोप्टेस स्कैबी है, जो वास्तव में आठ पैरों वाला माइक्रोस्कोपिक माइट( घुन-एक तरह का कीटाणु ) होता है, जो गंभीर खुजली, चकत्ते (रैशेज) और लगातार स्किन में जलन वाली स्थिति पैदा कर देता है।

चूंकि खुजली बेहद अधिक संक्रामक होती है, इसलिए इससे जुड़े कारणों और उपायों के बारे में कुछ जानकारी होना जरूरी है , ताकि इससे जल्द से जल्द निपटा जा सके। इस आलेख में आज हम यही चर्चा भी करने जा रहे हैं। साथ ही इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने एम्ब्रोसिया एस्थेटिक्स, मुंबई की डर्मेटोलिजस्ट और स्किन विशेषज्ञ डॉ निकेता सोनावने से बात की, ताकि आपको खुजली के कारणों, लक्षणों और प्रभावी उपचारों के बारे में जानकारी मिल सके, तो आइये जानते हैं विस्तार से

 

स्कैबिज़ के लक्षण क्या हैं?

स्कैबिज़ के लक्षण क्या हैं?

 

ऐसा हो सकता है कि कोई व्यक्ति स्कैबिज़ वाले व्यक्ति के संपर्क में आ जाये, लेकिन उनमें तुरंत लक्षण दिखना शुरू न हो, क्योंकि हर इंसान में इसके लक्षण दिखने का समय अलग हो सकता है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह व्यक्ति पहले उस माइट्स के संपर्क में आया है या नहीं। लेकिन आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि  इसके लक्षण लगभग दो से छह सप्ताह में दिखाई देने लगते हैं। लेकिन अगर व्यक्ति पहले से ही माइट के संपर्क में आ चुका है, तो उनकी इम्यून सिस्टम में तेजी से रिस्पॉन्ड होता है और फिर लक्षण एक से चार दिनों में दिखने शुरू हो जाते हैं।

1. खुजली
स्कैबिज़ का सबसे आम लक्षण है-स्किन पर लगातार खुजली का होना। यह खुजली दिन के दौरान काफी भयानक होती है और परेशान करती है।  लेकिन रात के दौरान तो यह और अधिक परेशान करने लगती है और स्थिति गंभीर हो जाती है। इसलिए बेहद जरूरी है कि खुजली करते समय सावधानी बरती जाए, क्योंकि अत्यधिक खुजली करने से अतिरिक्त संक्रमण हो सकता है, साथ ही समस्या और भी बदतर हो सकती है।

2. चकत्ते (रैशेज)
जब ये रैशेज अधिक परेशान करने लगते हैं (ये माइट्स आपकी स्किन पर एक ब्रीडिंग ग्राउंड बना लेते हैं), तो वो  विशेष रूप से स्किन के फोल्ड्स पर लाइन्स और ट्रैक्स बना लेते हैं। आमतौर पर ये ट्रैक छोटे कीड़े के काटने की वजह से जो निशान बनते हैं, वैसे दिखने लगते हैं या फिर मुंहासों या फुंसी, पित्ती( हाइव्स ) की तरह दिखते हैं। अगर ऐसे में स्थिति गंभीर हो जाए, तो यह स्किन पर स्कली (पपड़ीदार) स्किन बना देते हैं।

3. तकलीफ़दायक
यह  एक गंभीर खुजली की स्थिति होती है और  यकीनन आपकी स्किन को काफी नुकसान पहुंचाने वाली होती है ।  ऐसे में कुछ लोगों के गले की स्किन में ब्लिस्टर्स (फफोले) होने लगते हैं और यह  काफी दर्दनाक हो सकते हैं। यहां तक कि इस स्थिति में खून भी बहने लगता है।

दरअसल, स्कैबीज की जो यह समस्या है, यह आपके शरीर में दूसरों की तुलना में कुछ खास क्षेत्रों को अधिक संक्रमित कर देती है। खासतौर से आपकी कलाई(रिस्ट्स), कोहनी(एल्बो), आर्मपिट्स , कमर और बटॉक जैसे क्षेत्र पर अधिक संक्रमण होता है। चूँकि यह आम ब्रीडिंग ग्राउंड्स होते हैं,  इसलिए लक्षणों को पहचानते समय नज़र रखना बेहतर होगा।

 

 

खुजली का इलाज कैसे करें?

खुजली का इलाज कैसे करें?


जैसा कि पहले बताया गया है कि खुजली के लक्षण और कारण बेहद डरावने लगते हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि एक बार जब आप इस समस्या का पता लगा लेते हैं, तो इसका इलाज करना  उतना मुश्किल नहीं होता है। क्रीम, लोशन और ओरल मेडिसिन की मदद से, आपके डॉक्टर इसको ठीक करने की पूरी कोशिश करते हैं।
आमतौर पर, निर्धारित क्रीम और मलहम(ओइंटमेंट्स ) को स्किन पर अपना असर दिखाने के लिए, रात भर लगा कर रखा जाना चाहिए।आइये खुजली के कुछ आम उपचार जान लेते हैं, जिनके बारे में डॉक्टर भी सलाह देते हैं।

1. पर्मेथ्रिन क्रीम 

यह एक सामान्य स्किन पर लगाने वाली क्रीम है, जिसे डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अधिकांश उम्र के लोगों, गर्भवती महिलाओं और साथ ही दो महीने से अधिक उम्र के बच्चों द्वारा भी इसका उपयोग करना सुरक्षित होता है । पर्मेथ्रिन इतना प्रभावी है, क्योंकि यह कुछ ऐसे केमिकल के उपयोग से तैयार होता है,जो माइट्स और उनके अंडों को पूरी तरह से नष्ट करने में कारगर साबित होते हैं।

2. आइवरमेक्टिन (स्ट्रोमेक्टोल) –
यह आमतौर पर क्रस्टेड स्कैबिज़ जैसे गंभीर मामलों में डॉक्टरों द्वारा दिया जाता है। यह एक ओरल मेडिसिन है, जो आमतौर पर ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (विकारों) वाले लोगों के लिए भी निर्धारित किया जाता  है। इसके अतिरिक्त, यदि आपकी खुजली स्किन पर लगाने वाली दवाओं से ठीक नहीं हो रही है, तो आपका डॉक्टर आइवरमेक्टिन का सुझाव दे सकता है। हालांकि, यह दवा गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं या 15kgs से कम वज़न वाले बच्चों के लिए सही नहीं मानी जाती है ।

3. क्रोटामिटॉन (यूरैक्स, क्रोटन) -

यह भी एक अन्य प्रकार का टोपिकल ऑइंटमेंट है, लेकिन यह सबसे आम सुझाए गए उपायों की तरह नहीं है। लेकिन फिर भी आपका डॉक्टर आपको इसे केवल दो दिनों के लिए, दिन में एक बार लगाने की ही सलाह दे सकता है। हालांकि, यह उपचार गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों या छोटे बच्चों पर पूरी तरह से सुरक्षित साबित नहीं हुआ है। साथ ही इसका सक्सेस रेट भी बहुत खास नहीं है।