अक्सर आपने देखा होगा कि आपको स्किन केयर रूटीन उसी अनुसार फ़ॉलो करना पड़ता है, जैसा आपकी स्किन का टाइप होता है, यानी यह ड्राय, ऑयली, कोम्बिनेशन, नॉर्मल या सेंसिटिव हो सकता है. अब देखा जाए तो यह कहना आसान है, लेकिन इसके अनुसार अपना स्किन केयर रूटीन बनाना मुश्किल, क्योंकि हमारा स्किन का टाइप बदलता रहता है और एक ही तरह का स्किन केयर रूटीन से स्किन को फायदे की बजाय नुकसान हो सकता है. स्किन टाइप उम्र, हॉर्मोन्स में बदलाव, मौसम या बीमारी के कारण बदल जाता है. हमने इस बारे में बात की डॉक्टर साधना देशमुख से.

 

समय के साथ आपका स्किन टाइप कैसे बदलता है?

समय के साथ आपका स्किन टाइप कैसे बदलता है?

हम जब पैदा होते हैं, तो हमारी स्किन बहुत नाज़ुक होती है, यानी पीएच एल्केलाइन, जो जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं, एसिडिक में बदल जाता है. टीनएज में कुछ लोगों की स्किन प्यूबर्टी के कारण ऑयली हो जाती है. हालांकि, कुछ लोगों की ड्राय भी होती, अगर उन्हें एक्जिमा का प्रॉब्लम हो तो. 20 की उम्र में अतिरिक्त सीबम प्रोडक्शन के कारण एक्ने का प्रॉब्लम होता है. बहुत दिलचस्प बात है कि आपकी स्किन सबसे ज्यादा 20 और 30 के उम्र के बीच में होती है. इसके बाद जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है यानी 30 से 40 की उम्र के आस-पास आपकी स्किन ड्राय होने लगती है और चेहरे पर रिंकल्स और फाइन लाइंस नज़र आने लगती है. धीरे-धीरे आपकी स्किन अपना नेचुरल हायड्रेशन खोने लगती है, क्योंकि सिबेशियस ग्लैंड कम ऑयल प्रोड्यूस करने लगती है, जिससे स्किन ड्राय लगने के साथ लटकने लगती है." कहती हैं, डॉक्टर साधना.

 

अन्य बातें, तो स्किन टाइप बदल सकती हैं, वो हैं:

अन्य बातें, तो स्किन टाइप बदल सकती हैं, वो हैं:

 

01. होर्मोन्स: डॉक्टर साधना के अनुसार आपको अपनी ज़िंदगी में कई बार हॉर्मोन्स के बदलावों से गुज़रना पड़ता है, जिससे स्किन टाइप बदलता है. प्युबर्टी के कारण आपकी स्किन ऑयली हो सकती है, वहीं समय से पहले मेनोपोज़ होने से स्किन ड्राय, डीहायड्रेटेड और रिंकल वाली हो जाती हैं.

02. क्लाइमेट: डॉक्टर साधना कहती हैं, "क्लाइमेट और एनवायरोमेंट आपकी स्किन को बहुत प्रभावित करती है. सर्दियों के मौसम में स्किन ड्राय हो जाती है, जिससे आपको गाढ़ा मोइश्चराइज़र यूज़ करने के ज़रुरत पड़ती है. इसी तरह गर्मियों के मौसम में स्किन ऑयली हो जाती है, तब आपको लाइट वेट और नरिशिंग स्किन लोशन लगाने की ज़रुरत पड़ती है. सनस्क्रीन हर मौसम में लगाना चाहिए."

03. डायट: आप जो भी खाते हैं, वह आपकी स्किन टाइप को प्रभावित करता है. हेल्दी फ़ूड खाने से समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत नज़र नहीं आते. वहीं, खाने की खराब आदतें, जैसे- शक्कर और दूध के पदार्थ आपकी स्किन के कोलेजन प्रोडक्शन को डिस्टर्ब कर देता है, जिससे स्किन को नुकसान पहुंचता है और उसका टाइम बदलने लगता है.

04. लाइफस्टाइल: आपकी लाइफस्टाइल भी आपका स्किन टाइप बदल सकती है. तनाव आदि से स्किन ड्राय होती है.

 

 

कैसे निपटें स्किन टाइप में बदलाव से

कैसे निपटें स्किन टाइप में बदलाव से

 

डॉक्टर साधना कहती हैं कि जब भी आपको अपनी स्किन में बदलाव नज़र आय तो आप डर्मेटोलोजिस्ट से मिलें, साथ में इन बातों का भी ध्यान रखें:

सही प्रोडक्ट्स चुनें, खासतौर पर फेस वॉश और मोइश्चराइज़र अपनी स्किन टाइप के अनुसार ही चुनें.

यदि जॉ लाइन पर एक्ने है तो यह हार्मोनल असंतुलन के कारण है, उसी के अनुसार प्रोडक्ट्स चुने.

वही इन्ग्रेडिएन्ट्स शामिल करें, जो आपके स्किन प्रोब्लम्स से लड़ सके. ऑयली स्किन के लिए सेलिसिलिक एसिड, मेंडेलिक एसिड और ग्लायकोलिक एसिड वाले इन्ग्रेडिएन्ट्स चुनें. इसी तरह ह्यालुरोनिक एसिड वाले इन्ग्रेडिएन्ट्स कोम्बिनेशन स्किन के लिए उचित है और यह टी-ज़ोन को ऑयली भी नहीं बनाता.

अपनी डायट में एंटीऑक्सीडेंट्स शामिल करें, जो हर तरह की स्किन टाइप के लिए बढ़िया है.