चेहर पर आए काले धब्बे (डार्क स्पॉट्स) आपको किसी दुश्मन से कम नहीं लगते हैं, है ना? हो भी क्यों ना? वे आपके चेहरे को बेजान और आपकी रंगत को असमान जो दिखाते हैं.  पर क्या आपको इनके होने का कारण पता है? ये डार्क स्पॉट्स त्वचा को सूरज की किरणों से होने वाले नुक़सान के कारण, मुहांसों के पुराने दाग़ की वजह से या फिर त्वचा पर किसी तरह के घाव या नुक़सान की वजह से हो सकते हैं. और ये तो ऐसी चीज़ें हैं, जो बावजूद इसके कि आप कितनी भी अच्छी तरह स्किन केयर रूटीन अपना रही हों, किसी को भी हो सकती हैं.

इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि आपको इन काले धब्बों के साथ समझौता करना होगा, बल्कि हम तो आपको यह बताने जा रहे हैं कि इन काले धब्बों का इलाज करने में समय लग सकता है, लेकिन इन्हें पूरी तरह ठीक किया जा सकता है. यदि आप इन्हें हल्का करना चाहती हैं या चाहती हैं कि ये आपके चेहरे से हट जाएं तो आपको स्किनकेयर के कुछ नियमों का पालन करना होगा.

 

नियम#1: मुहांसों को छेड़ें या दबाएं नहीं

नियम#1: मुहांसों को छेड़ें या दबाएं नहीं

चेहरे पर पिम्पल दिखा नहीं कि आपकी सबसे पहली इच्छा होती है- इसे फोड़ दो. लेकिन ऐसा कभी न करें, क्योंकि इससे एक चेहरे पर सूजा हुआ भूरा या लाल निशान आ जाएगा जो महीनों तक आपके चेहरे का साथ नहीं छोड़ेगा और हमें पता है कि आप ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगी. मुहांसों को फोड़ने से बने घाव में बैक्टीरियाज़ भीतर तक पहुंच सकते हैं, इससे मुहांसा लाल हो सकता है, सूजन आ सकती है, जलन हो सकती है और इन्फ़ेक्शन भी हो सकता है. कभी-कभी तो इस जगह स्थाई दाग़ भी बन जाता है.

 

नियम#2: सनस्क्रीन को अपना जीवनभर का दोस्त बना लें

नियम#2: सनस्क्रीन को अपना जीवनभर का दोस्त बना लें

क्या आपको पता है कि काले धब्बों के लिए सबसे बड़ा दोषी कौन है? सूरज की नुकसानदेह यूवी किरणें. लंबे समय तक धूप में रहने से त्वचा टैन होती है, सन बर्न होता है, डॉर्क स्पॉट्स, पिग्मेंटेशन और तो और स्किन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है. अत: यह बहुत ज़रूरी है कि आप सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें. मौसम चाहे सर्दी का हो, गर्मी का या बारिश का आपको ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन, जैसे- पॉन्ड्स सन प्रोटेक्ट नॉन-ऑइली सनस्क्रीन एसपीएफ़ 50/Ponds Sun Protect Non-Oily Sunscreen SPF 50, लगाए बिना बाहर नहीं निकलना चाहिए. यह नॉन-ऑइली है और हर तरह की स्किन के लिए उपयुक्त है. इसे हर दो-तीन घंटे बाद दोबारा लगाना न भूलें, ताकि आपको दिनभर सुरक्षा मिलती रहे.

 

नियम#3: केमिकल एक्स्फ़ॉलिएशन करवाएं

नियम#3: केमिकल एक्स्फ़ॉलिएशन करवाएं

यदि आपकी त्वचा पर काले धब्बे होते हैं या यह हाइपरपिग्मेंटेशन के लिए संवेदनशील है तो फ़ेस स्क्रब इस्तेमाल करने की जगह केमिकल एक्स्फ़ॉलिएशन को तरजीह दें. क्योंकि फ़ेस स्क्रब आपके चेहरे के लिए बहुत कठोर हो सकता है. अल्फ़ा हाइड्रॉक्सी ऐसिड्स, जैसे-ग्लाइकॉलिक, डार्क स्पॉट्स को ठीक करने में कारगर होते हैं. ये उस ‘जोड़’ को ख़त्म करने में सहायक होते हैं, जो मृत और बदरंग कोशिकाओं को आपकी त्वचा से जोड़े रखता है. यह जोड़ टूटने से आपकी त्वचा की रंगत उजली हो जाती है, दाग़-धब्बे हट जाते हैं. और यही नहीं, केमिकल एक्स्फ़ॉलिएटर्स मृत कोशिकाओं को त्वचा से हटा देते हैं, जिससे आप जब कोई भी स्पॉट ट्रीटमेंट लेती हैं तो उसके प्रोडक्ट्स आपकी त्वचा के भीतर अच्छी तरह अवशोषित होते हैं, ज़्यादा असर करते हैं.

 

नियम#4: डार्क स्पॉट ठीक करने वाले सीरम्स का इस्तेमाल करें

नियम#4: डार्क स्पॉट ठीक करने वाले सीरम्स का इस्तेमाल करें

काले धब्बे चाहे आपको ज़रूरत से ज़्यादा धूप में रहने से हुए हों या पुराने मुहांसे के दाग़ों से, इन्हें ठीक करने में महीनों या हफ़्तों का समय लग सकता है. अत: स्किन ब्राइटनिंग सीरम्स में निवेश करना एक अच्छा विकल्प है. हम आपको डर्मैलॉजिका ऐक्टिव क्लीयरिंग एज ब्राइट स्पॉट फ़ेडर/ के इस्तेमाल की सलाह देंगे. इसके फ़ार्मूला में सैलिसिलिक ऐसिड है, जो ब्रेकआउट्स को हटाता है और इसमें नाइअसिनामाइड व हेक्सिलरेसॉर्सिनॉल भी है जो ब्रेकआउट्स के बाद के दाग़ों को हटाता है.